Thursday, March 7, 2024

9 मार्च को लगेगी मोहाली में 2024 की राष्ट्रीय लोक अदालत

Thursday 7th March 2024 at 6:23 PM 

समाज के कमजोर वर्गों को इसका फायदा भी समझ में आने लगा है 


एसएएस नगर
: 7 मार्च, 2024: (कार्तिका कल्याणी सिंह-मीडिया लिंक//मोहाली स्क्रीन डेस्क)::

बात तब की है जब शिक्षा भी कम थी और तकनीकी सुविधाएं भी कम थी तो झगड़ों झमेलों को पंचायती आधार पर सुलझा लिया जाता था। उसी न्याय प्रणाली से एक संकल्पना ने जन्म लिया तांकि लोगों को न्याय  प्राप्ति की एक ऐसी प्रक्रिया दी जाए जो सर्वसुलभ भी हो और आसान भी हो। उसी संकल्पना के साकार रूप को आज बहुत ही प्रेम और सम्मान से लोक अदालत कहा जाता है। 

लोक अदालत  मौजूदा नवीनतम रूप का यह इतिहास कोई ज़्यादा पुराना भी नहीं। न्याय को तीव्र, सस्ता सुलभ बनाने की इन्हीं कोशिशों के अंतर्गत पहली लोक अदालत 14 मार्च 1982 को गुजरात के जूनागढ़ में आयोजित की गई थी। इसके जल्दी ही बाद महाराष्ट्र ने 1984 में लोक न्यायालय की शुरुआत की। इस प्रक्रिया में कुछ और तेज़ी आई और कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 ने लोक अदालतों को वैधानिक दर्जा भी प्रदान कर दिया। 

इसी के चलते भारत के संविधान के अनुच्छेद 39-ए में संवैधानिक आदेश के अनुसार। यह निःशुल्क और सक्षम कानूनी सेवाएं प्रदान करने के लिए कानूनी सेवा प्राधिकरण का गठन भी किया गया। इसकी लोकप्रियता भी तेज़ी से बढ़ने लगी। समाज के कमजोर वर्गों को इसका फायदा भी समझ में आने लगा। 

लोक अदालतों में बहुत से विवादों के मामले पहुंचने लगे। इनमें ज़्यादातर मामले मोटर दुर्घटना दावा मामले, वैवाहिक/पारिवारिक विवाद, श्रम विवाद, टेलीफोन, बिजली जैसी सार्वजनिक सेवाओं से संबंधित विवाद,  बैंक वसूली मामले, भूमि अधिग्रहण विवाद हुआ करते। 

सत्र प्रभाग, एसएएस नगर में, राष्ट्रीय लोक अदालत श्री के नेतृत्व में 09.03.2024 को आयोजित की जाएगी। हरपाल सिंह, जिला एवं सत्र न्यायाधीश, जिसमें 4092 प्री-लिटिगेटिव और 5521 लंबित मामलों सहित 9613 मामलों की सुनवाई 20 बेंचों द्वारा की जाएगी। जिला मुख्यालय, एसएएस नगर में 12 लोक अदालत बेंच मामलों को निपटाने के लिए काम करेंगी, जबकि खरड़ में 4 बेंच और डेरा बस्सी में 04 बेंच मामलों के निपटारे के लिए काम करेंगी।

आपराधिक समझौता योग्य अपराध, धारा-138 के तहत एनआई अधिनियम के मामले, बैंक वसूली मामले, एमएसीटी मामले, वैवाहिक विवाद, श्रम विवाद, भूमि अधिग्रहण मामले, बिजली और पानी के बिल (गैर-समझौता योग्य चोरी के मामलों को छोड़कर), वेतन और भत्ते से संबंधित सेवा मामले और पार्टियों के बीच निपटान के लिए सेवानिवृत्ति लाभ, राजस्व मामले और अन्य नागरिक मामले (किराया, आसान अधिकार, निषेधाज्ञा सूट, विशिष्ट प्रदर्शन सूट) आदि पर विचार किया जाएगा।

सुश्री सुरभि पराशर, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-सह-सचिव, जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण, एसएएस नगर ने जनता से दोनों पक्षों की जीत की स्थिति के लिए लोक अदालत के माध्यम से अपने मामलों को निपटाने का आग्रह किया। 

उन्होंने आगे खुलासा किया कि लोक अदालत में निपटाए गए मामले का निर्णय अंतिम होगा और इसके खिलाफ कोई अपील या पुनरीक्षण नहीं होगा। लोक अदालत में अपने मामले का निपटारा करने पर पक्षकारों को उनके द्वारा लगाई गई अदालती फीस वापस कर दी जाती है।

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